लघु सिंचाई विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

परिदृश्य

प्रदेश में संचालित लघु सिंचाई कार्यक्रम विश्व में किसी एक विभाग या संस्था द्वारा संचालित किये जाने वाला सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इसका आकार भारतवर्ष में क्रियान्वित किये जा रहे लघु सिंचाई कार्यक्रम का लगभग एक तिहाई है। इस कार्यक्रम का प्रदेश के सिंचन क्षेत्र में विशाल योगदान है। वर्तमान ऑकडों के अनुसार प्रदेश के शुद्ध सिंचित क्षेत्र में लघु सिंचाई साधनों का योगदान लगभग 77.90 प्रतिशत है। यह कार्यक्रम कृषकों के सहयोग से उनके सिंचाई साधनों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु संचालित किया जाता है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का अप्रतिम उदाहरण है।

इस कार्यक्रम को प्रदेश के भौगोलिक भू-भागों के आधार पर मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित कर निजी सिंचाई के परिदृष्य को समझा जा सकता है।

मैदानी भाग

प्रदेश का मैदानी भाग एल्युवियल क्षेत्र है जिन भागों में जलस्तर कम गहराई पर है वहॉ सामान्यतः भूमि तल से 30मी0 की गहराई की उथली बोरिंग होती है, जो अपेक्षाकृत सहज, सरल एवं सस्ती होती है। प्रदेश के जिन क्षेत्रों में जलस्तर अधिक गहराई पर है वहॉ एल्यूवियल क्षेत्र में मध्यम गहरी बोरिंग योजना चलाई जा रही है जिसकी गहराई भूतल से 31 से 60मी0 तक होती है। उसके अतिरिक्त ऐसे एल्युवियल क्षेत्र जहॉ निःशुल्क बोंरिग सम्भव न हो, के लिए सामूहिक नलकूप योजना भी संचालित है।

60मी0 से अधिक गहराई वाले एल्यूवियल क्षेत्रों में गहरी बोरिंग की योजना क्रियान्वित है।

पठारी क्षेत्र

प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 07 जनपद तथा जनपद इलाहाबाद के यमुना पार पठारी क्षेत्रो में सिंचाई की सुविधा प्रदान किया जाना कठिन, दुरूह, श्रमसाध्य एवं महंगा कार्य है। इन क्षेत्रों के विकास हेतु ब्लास्टवेल, हैवीरिंग बोरिंग, गहरे नलकूप निर्माण, इनवेल रिग द्वारा कूप बोरिंग, चेकडैम, बन्धी आदि कार्य कराये जाते है।